बात उन दिनों की है जब मैं कक्षा 7वी मे पढ़ता था। हमारे स्कूल मे वार्षिक परीक्षा होने वाली थी। सर ने सभी बच्चो को कहा सभी बच्चे अच्छे से पढ़ कर आना।  सभी बच्चों ने कहा ठीक है। और उसके बाद छुटटी हो गयी सभी बच्चे अपने अपने घर जाने लगे। घर जाकर सभी बच्चे परीक्षा की तैयारी करने लगे।


अगले दिन सभी बच्चे पेपर देने के लिए स्कूल आ गए। सभी बच्चे डरे हुए थे कि पेपर कैसे आएगा। फिर थोड़ी देर मे स्कूल की घंटी बजी ओर सभी बच्चे एग्जाम हॉल मैं जाके बैठ गए। सर सभी बच्चो के लिए पेपर ओर कॉपी ले आये सर ने सभी बच्चो को कॉपी दे दी। और 5 मिनट बाद पेपर भी दे दिया। सभी बच्चे अपना अपना पेपर करने लगे।


   थोड़ी देर बाद हमारे वाले सर चले गए और उनकी जगह दूसरे सर आ गए जो बहुत अच्छे थे। वो आये तो सभी बच्चे खुश हो गए क्योंकि हमने सोचा अब हम चीटिंग कर सकते है। सर ने कहा जिसको चीटिंग करनी है वो कर सकता है लेकिन अगर किसी ने आवाज ज्यादा किया तो मैं उसको बहुत ज्यादा मारूँगा। सभी बच्चे हल्ला गुल्ला करने लग गए। सर ने सभी बच्चो को बहुत बार समझाया कि हल्ला मत करो मेरे हाथों से पीट जाओगे । लेकिन उनकी कोई भी बच्चा बात नही सुन रहा था। सर को बहुत ज्यादा गुस्सा आने लगा।


 फिर सर एक बच्चे को बार बार देखने लगे जो बहुत ज्यादा बात कर रहा था। सर उसके पास गए और बिना कुछ बोले उसको मारने लगे उसके चाटे है चाटे मारे। डंडे से भी बहुत ज्यादा मारा। सभी बच्चे उस टाइम चुप हो गए। लेकिन सर उस बच्चे को मारे ही जा रहे थे। फिर वो रोने लगा तो सर ने उसको छोड़ दिया। और कहा अब बोलो अब क्यों नही बोल रहे हो। किसी भी बच्चे ने कुछ नही बोला और ना ही उसके बाद चीटिंग की।

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